राज्यपाल /GOVERNOR

                ★  राज्यपाल  ★

                          ★GOVERNOR  ★   

         सध्याचे राज्यपाल खुपच चर्चेत असतात चला तर आज आपण राज्यपाल यांची माहिती थोडक्यात  पाहूयात  घटक राज्याचा पहिला नागरिक म्हणून आपण राज्यपालांना ओळखतो. ते घटक राज्याच्या कार्यकारी मंडळाचे प्रमुख व राज्य विधिमंडळाचे अंग असतात .भारतीय संविधानाच्या 153 कलामान्वये प्रत्येक राज्याचे राज्यपाल असेल तथापि 7 वी घटना दुरुस्ती 1956  नुसार एकाच व्यक्तीची दोन किंवा अधिक राज्याकरिता राज्यपाल म्हणून नेमणूक करता येते. कलम 155 नवीन राष्ट्रपती आपल्या सहीनिशी व स्वमुद्रांकीत अधिपत्राद्वारे राज्यपालांची नेमणूक करतात.
                त्यांचा  किमान पदावधी घटनेने निश्चित केलेला नाही मात्र राष्ट्रपतींची मर्जी असेपर्यंत ते पद धारण करू शकतात. राष्ट्रपतींच्या मर्जीला न्यायालयात आव्हान देता येत नाही. राज्यपाल होण्यासाठी पात्रता वय पस्तीस वर्ष पूर्ण असली पाहिजे .तसेच तो व्यक्ती भारताचा नागरिक असला पाहिजे. राज्यपालांसाठी वेतन साडेतीन लाख रुपये प्रति महिना (हे एक फेब्रुवारी 2018 पासून) .

                स्वतंत्र भारतातील घटक राज्याच्या पहिला महिला राज्यपाल  म्हणून सरोजनी नायडू यांना ओळखले जाते. महाराष्ट्राचे पहिले राज्यपाल श्री प्रकाश डिसेंबर 1956 ते 1962 पर्यंत. तर महाराष्ट्राच्या पहिल्या महिला राज्यपाल विजयालक्ष्मी पंडित 1962 ते 64 .तसेच आतापर्यंत महाराष्ट्राचे सर्वाधिक काळ पदावर राहिलेले राज्यपाल डॉक्टर पीसी अलेक्झांडर 1993 ते 2002 .
                आपण महाराष्ट्राच्या सध्याच्या राज्यपालांची माहिती पाहूयात. त्यांचे पूर्ण नाव भगतसिंग गोपाल सिंह कोश्यारी आहे. त्यांचा जन्म 17 जून 1942 ला बागेश्वर उत्तराखंड येथे झाला. त्यांनी 5 सप्टेंबर 2019 ला पदभार स्वीकारला ते महाराष्ट्राचे 22 वे राज्यपाल होत. त्यांनी प्राध्यापक, लेखक ,पत्रकार, राजकारणी असे विविध क्षेत्रात कार्य केले आहे.
महाराष्ट्राचे राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी
(2020)
                     कारकीर्दीविषयी आपण थोडक्यात माहिती पाहूया त्यांनी अलमोरा कॉलेज उत्तर प्रदेश मधून इंग्रजी साहित्यात एम.ए केले आहे. राजा इंटर कॉलेज येथे काही दिवस त्यांनी प्राध्यापक म्हणून काम केले.तसेच ते पर्वत पियुष या साप्ताहिकाचे संस्थापक व व्यवस्थापकीय संपादक म्हणून कार्यरत होते ते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघाचे स्वयंसेवक असून त्यांनी जुलै 1975 ते मार्च 1974 पर्यंत राष्ट्रीय आणीबाणी दरम्यान तुरुंगवास भोगला.
                  मे 1997 मध्ये ते उत्तर प्रदेश विधान परिषदेचे सदस्य तसे 2001 ते 2002 मध्ये उत्तराखंडचे दुसरे मुख्यमंत्री होते तसेच त्यांनी उत्तराखंड राज्याचे भाजपाचे पहिले राज्य घटक अध्यक्ष म्हणूनही काम पाहिले
                  त्यांची  उत्तरांचल प्रदेश क्यूँ? आणि उत्तरांचल संघर्ष एवं  समाधान इत्यादि प्रसिद्ध पुस्तके आहेत...
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ओझोन वायू , ओझोन थर, ozone


                  ओझोन थर

           
                      आज आपण ओझन थराविषयी माहिती घेऊया साधारणत: सूर्यापासून येणाऱ्या अतिनील किरणांपासून आपले संरक्षण करणारा वायू म्हणजे ओझोन वायू अशी आपल्याला त्याची ओळख आहे .हा वायू स्थितांबराच्या खालच्या थरात आढळतो. जगभरात 16 सप्टेंबर हा दिवस ओझोन पट्ट्याच्या संरक्षणासाठी ओझोन दिन म्हणून साजरा केला जातो .ओझोन पट्ट्याला धोकादायक असणाऱ्या पदार्थांना वापरातून बंद करण्याबाबत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 16 सप्टेंबर 1987 ला केला म्हणून हा दिवस दरवर्षी साजरा केला जातो. 
                    संयुक्त राष्ट्र संघाकडून पर्यावरण संरक्षणाच्या जागृतीसाठी 5 जून रोजी जागतिक पर्यावरण दिन जगभर साजरा केला जातो. प्रथमतः जागतिक पर्यावरण दिन 1974 यावर्षी साजरा करण्यात आला सागरी प्रदूषण मानवी लोकसंख्या वाढ जागतिक तापमान वाढ त्यामुळे पर्यावरणासंबंधी निर्माण होणाऱ्या समस्या याबाबत जागृती ,तसेच संसाधनांच्या शाश्वत वापर करण्यास प्रवृत्त करणे हा त्यामागचा हेतू होय.         
पर्यावरण दिनाच्या यजमानचा बहुमान या वर्षी भारताला मिळाला. या वर्षीची पर्यावरण दिनाची संकल्पना Beat Plastic Pollution अशी होती.
       मुख्यतः ओझोन ऑक्सिजनच्या तीन   अणूपासून बनलेला असतो.साधारणतःतो स्थितांबराच्या खालच्या भागात आढळतो.ओझोन चा ऱ्हास मुख्यतः         CFC,NO,NO2,मिथेन इत्यादिमूळे होतो.ओझोन थराला पडलेले छिद्र सर्वप्रथम 1985 मध्ये  अंटार्टिकावर शास्त्रज्ञानांच्या निदर्शनास आले.त्यांच्या मतानुसार 1977-1984 पर्यंत ओझोनच्या प्रमाणात जवळपास 40% घट झाली.     
              अशा धोक्याच्या घंटेनंतर ओझोन थराचा ऱ्हास थांबवण्यासाठी आंतरराष्ट्रीय स्तरावर हालचालींना वेग आला त्यासाठी विविध करार करणयात आले ते पुढीलप्रमाणे:
       ★ व्हिएन्ना करार 1985
       ★मॉन्ट्रियल करार 1987
       ★लंडन करार 1989
       ★कोपेनहेगन परिषद 1992.
       याशिवाय इतरही अनेक प्रकारे ओझन चा ऱ्हास रोखण्यासाठी प्रयत्न केला जात आहे. पण फक्त एवढ्यावरच थांबून आपल्याला चालणार नाही आपलाही त्यात काही ना काही हातभार लागला पाहिजे आपण काय करू शकतो>>>
      1) सिग्नलला गाडी बंद ठेवणे
      2) फ्रीझ चा मर्यादित वापर
      3) प्लास्टिक न जाळणे.
    अशा अनेक प्रकारे आपण ओझोनचे संतुलन ठेवण्यास मदत करू शकतो.नाहीतर जागतिक तापमानात आणखी वाढ होऊन पृथ्वीवर राहणे असह्य होऊन जाइल.म्हणतात ना "आपल्याच हाती आहे आपले भविष्य".....
                                               
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Depression ,मानसिक तणाव

               आज हम बात करेंगे हमारे जीवन मैं आनेवले मानसिक तणाव या depression के बारे मैं । आज दुनिया मैं लगबग हर दुसरा व्यक्ती इससे परेशान हैं। हम सभी ने भी जीवन मैं कभी ना कभी इसका सामना किया है और कूछ अभी भी कर रहे हैं।
            पहले हम इसके लक्षणों को देखते हैं। जो भी डिप्रेशन मैं होता है।
★ उसे कभी ज्यादा भूख लगती है तो कभी कभी खाना जाता ही नहीं,
★बहुत जल्दी गुस्सा आजाना,
★हर वक्त negative thoughts मन में चलना ,
★खुद को अकेला समझना ,
★या खुद को कोई शाररिक बीमारी हुई है ऐसा महसुस होना,
(उपर के लक्षण किसी दूसरे भी रोग के कारण हों सकते हैं उचित हैं डॉक्टर को दिखाना)

        साधारणत: एक व्यक्ती को एक दिन मैं लगभग 6-7 घंटे की नींद की आवश्यकता है लेकीन, तणाव में व्यक्ति अपनी निंद पुरी नही कर पाता , उसकी नींद सुबह बहुत जल्दी खुल जाती है या वह अनिद्रा का शिकार हो जाता है। नींद के बाद भी उसे थकावट और आलस्य महसूस होत है। कुछ मरीजों में अत्यधिक नींद भी पाई गई है पर उसमें भी वह थका हुआ ही उठता है व्यक्ति, खुद को तरोताजा महसूस नहीं कर पाता । वह हमेशा थकान और बेचैनी को महसुस करता है।
           अब इसपर कुछ नैसर्गीक उपयो को देखते हैं।अनलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, ध्यान (meditetion) और सूर्य नमस्कार तथा योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। घर के बाहर निकलें, प्रतिदिन सैर पर जाएं और व्यायाम को अपने जीवन में स्थान दें तनाव अपने आप आपसे दूर हो जाएगा। और हमेशा याद रखें, इससे फर्क नहीं पड़ता आप कौन हैं, जीवन तब तक सही नहीं चलता जब तक आप सही चीजें नहीं करते।
         यदि आप सही परिणाम चाहते हैं तो सही कार्यों का चयन करें फिर जीवन हर दिन एक खूबसूरत चमत्कार से कम नहीं है। हमें अपने जीवन का चार्ज अथवा जिम्मेदारी लेनी होगी जिससे हमारे अन्दर की असीमित क्षमताएं निखर कर आएगीं और तनाव रहित जीवन बनाना आसान हो जाएगा।
    अपना और अपने परिवार का ख्याल रखो  कभी कभी नजर में नही आता लेकिन depression वाला व्यक्ति हमारे साथ होकर भी हमे महसूस नही होता आप भी मानसिक तनाव मैं न जाओ और दूसरों को भी जाने न दो जो गए हैं उन्हें बाहर निकलने मैं मदद करो । स्वस्थ रहो मस्त रहो खुश रहो ।...…
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परीक्षा का तणाव

                       परीक्षा का दौर  चालू होने  जा रहा है  । साल भर जो  विद्यार्थी सही ढंग से पढाई नही कर पाये  उनके मन मे  परीक्षा का तनाव  ज्यादा है । ऐसे भी कई सारे बच्चे है  जो साल भर  उचित पढाई  करते हुए भी  परीक्षा के तनाव मे रहते है।  बच्चों के मन में  विश्वास होना चाहिये की हमे कुछ भी असंभव नही है।।                               असफलता  या कम नंबर मिलते है तो हमे और एक मोका मिलता  है  जिसे  सीखने का अवसर  हमे मिलता है अगले कई दिनो मे  विद्यार्थी  परीक्षा का सामना करने वाले है ।  परीक्षा का नाम सुनते ही डर जाते है।  सभी स्टुडंट का अच्छा स्टडी होने के बाद भी और नही होने के बाद भी परीक्षा का तनाव मन मे रहता है ।हमे पुरी जिंदगी मे कभी ना कभी किसी ना किसी परीक्षा का सामना करना ही होता है। लेकिन जीवन में परीक्षा ही सब कुछ नही है ।परीक्षा तो जीवन का एक हिस्सा है। पहले तो हमारा जीवन महत्वपूर्ण है ।उसमे आसानी से अपना भविष्य बनाने मे परीक्षा एक मूल्यमापन की सीडी के रूप मे होती है।  हम उसे पार करते है।  सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है की परीक्षा का थोडा टेन्शन सभी स्टुडन्ट और उनके परेन्ट्स के मन में होता ही है।
           परीक्षा का माहोल बनाये रखने के लिए हमारी सकारात्मक सोच और आत्मविश्वासता पूर्वक परीक्षा का सामना करना  बहुत जरुरी होता है । इस वक्त खुद पर भरोसा और टाईम मॅनेजमेंट निरोगी तनऔर मन  सकारात्मक दृष्टीकोन होना जरुरी है। जो भी हमने साल भर के पढाई मे पाया है उसकी सही मात्रा मे रीविजन और सारे महत्वपूर्ण पॉइंट्स को अवलोकन करना उचित रहता है ।अन्यथा सिर्फ अंको के पीछे हमारे विचारधारा चलने लगती है तो हम और एक अलग ही तनाव मे करते है। सारे पेरेंट्स अपने बच्चों को अपनी खुद की इच्छा पूर्ण करने का दबाव डालते है। तुलनात्मक दृष्ट्या अन्य बच्चों की तुलना अपने बच्चों के साथ करते है। जो पुरा परिवार टेंशन की शिकार बन जाता है।  परीक्षा केवल अंक से मूल्यमापन करने की एक मात्र सीडी नही है।जो अंक मिलेंगे या परिणाम हमे मिलने वाले है। वह हमारे मेहनत और समज के साथ जो हमने  स्टडी की है ।उसी का
परिणाम नापने का परीक्षा एक  उचित साधन है।
                 सही ढंग से परीक्षा एक उत्सव के रूप में हमे साकार करना चाहिये। बच्चों के मन में जो भी हलचल  चल रही है उसका पता परेंट्स को या मित्रपरिवार और टीचर को होना जरुरी है। तनाव का सिलसिला और जिम्मेदारी गुड पेरेंटींग का एक हिस्सा है ।अगर अपना बच्चा परीक्षा का सामना करने के लिए कुछ बात करते समय निराशाजनक नजर आता है तो उसके साथ विश्वासता पूर्वक हमे बात करनी चाहिए।  क्या समस्या है? समस्या है तो उसका हल है। 
                   समस्या सुलझाने के लिए हमारे पास काफी समय होता है ।परीक्षा के दौरान मे सारे बच्चे शारीरिक और मानसिक रुप से कमजोर बनते है।  उनको भावनिक सहायता की जरुरत होती है। मेरा कहना है इसमे टीचर और पेरेंट्स का रोल महत्त्वपूर्ण  है । स्टुडंट का परीक्षा के दौरान मन मे जो तनाव  होता है । वो हमे पता करना चाहिए । हम देखते है सारे बच्चे परीक्षा मे अच्छे अंक नही पाते है । तो  खुदखुशी  जैसी हरकत तथा घर से भाग जाने की कोशिश करते है। सारी जिम्मेदारी पेरेंट्स और टीचर्स पर आती है।  सभी पेरेंट्स की यह अच्छी जिम्मेदारी है । हम हर तरह अपने बच्चों को समझ सकते है और असल में जो भी  तनाव का कारन है । उसे पता करके हम उसका  पूरा हल निकाल सकते है।
                  परीक्षा के दिनो मे बच्चो के खानपान का और अच्छी नींद का खयाल रखना जरूरी होता है। अगर परीक्षा के तनाव मे हम जादा देर तक जागरन करते है तो  हमारा स्वास्थ्य पूरी तरह से खराब होता है। और उसके वजह से हम बीमार हो जाते है परीक्षा के वक्त मे पुरा   सत्त्वयुक्त आहार बहुत जरूरी होता है।  मानसिक स्वास्थ्य के लिए मेडिटेशन का  भी बहुत बडा फायदा होता है। परीक्षा के दौरान बच्चा अपने खानपान का ख्याल रखे ।परीक्षा जैसे महत्त्वपूर्ण समय मे अगर हम बीमार हो जाये तो भारी नुकसान हो सकता है। परीक्षा के दौरान हमेशा कई विद्यार्थी कठीन विषय के बारे में ज्यादा सोच सोच कर परेशान होते है।जो विषय में  बच्चे कमजोर है। इस समय मे बच्चों को पढे हुए पर भरोसा करना चाहिए ।
           परीक्षा के समय आपना टाईम मॅनेजमेंट सही ढंग से बनाय रखे सोने और जागने का समय उचित होना चाहिये ।परीक्षा की ज्यादा चिंता हो तो बच्चों का विस्मरण हो सकता है। इसलिये हर प्रकार का तनाव को हटा देना चाहिये। परीक्षा के समय में बच्चों को अधिक नई  चीजे कभी भी नही पढनी चाहिये। ऐसा करना तनाव का कारन बन सकता है ।अपने पढे हुए टॉपिक्स अच्छी तरह से रिविजन करे तो अच्छा रहेगा ..बेस्ट ऑफ लक.
                                  समुपदेशक
                            श्री.शिवाजी मुटकुळे.
     

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